Shree Gopal caterars
caterars sarvis
શ્રી ગોપાલ catersrs
06/02/2025
अलाउद्दीन ख़िलजी की जुरअत ऐसी थी की जब एक बार मंगोल सरदार ओलजेतू ख़ान ने अलाउद्दीन ख़िलजी के दरबार में एक मंगोलो का समूह भेजा उनकी मांग थी कि अलाउद्दीन ख़िलजी अपनी शहज़ादी को उनके साथ कर दें, क्योंकी मंगोल सरदार उनकी शहज़ादी को अपनी बीवी बनाना चाहता है। तब अलाउद्दीन ख़िलजी ने कुछ इस तरह जवाब दिया की उसके दरबार में आए सभी 18 मंगोलो के सर हाथियो के पांवो से कुचलवा दिये और ये पैग़ाम मंगोलो तक पहुंचा दिया गया की यह अलाउद्दीन का जवाब है।
इसके बाद कभी मंगोलो ने भारत की तरफ़ पलटने की हिम्मत नहीं की यह बात सही है कि उस दौर में मंगोलो से ज़्यादा बर्बर कोई नहीं था उन्होने संपूर्ण एशिया को रौंद दिया था लेकिन हिंदोस्तान आने पर उनका मुक़ाबला अलाउद्दीन ख़िलजी और उनके बहादुर सिपहसालार ज़फर से मुक़ाबला हुआ और यही वो सिपहसालार जो अपनी तमाम ज़िंदगी मंगोलो से लड़ते रहे अगर इन्होने मंगोलो को ना खदेड़ा होता तो आज यहां का इतिहास और भूगोल कुछ और होता।
સાથે Chandni Mishra - હું એક સ્ટ્રીક પર છું! હું સતત 3 મહિનાથી ટોપ ફેન છું. 🎉
19/02/2024
पाटण की रानी #रुदाबाई जिसने सुल्तान बेघारा के सीने को फाड़ कर 👉 #दिल निकाल लिया था, और कर्णावती शहर के बिच में टांग दिया था, ओर
👉धड से #सर अलग करके पाटन राज्य के बीचोबीच टांग दिया था।
गुजरात से कर्णावती के राजा थे, #राणा_वीर_सिंह_वाघेला( #सोलंकी ), ईस राज्य ने कई तुर्क हमले झेले थे, पर कामयाबी किसी को नहीं मिली, सुल्तान बेघारा ने सन् 1497 पाटण राज्य पर हमला किया राणा वीर सिंह वाघेला के पराक्रम के सामने सुल्तान बेघारा की 40000 से अधिक संख्या की फ़ौज
२ घंटे से ज्यादा टिक नहीं पाई, सुल्तान बेघारा जान बचाकर भागा।
असल मे कहते है सुलतान बेघारा की नजर रानी रुदाबाई पे थी, रानी बहुत सुंदर थी, वो रानी को युद्ध मे जीतकर अपने हरम में रखना चाहता था। सुलतान ने कुछ वक्त बाद फिर हमला किया।
राज्य का एक साहूकार इस बार सुलतान बेघारा से जा मिला, और राज्य की सारी गुप्त सूचनाएं सुलतान को दे दी, इस बार युद्ध मे राणा वीर सिंह वाघेला को सुलतान ने छल से हरा दिया जिससे राणा वीर सिंह उस युद्ध मे वीरगति को प्राप्त हुए।
सुलतान बेघारा रानी रुदाबाई को अपनी वासना का शिकार बनाने हेतु राणा जी के महल की ओर 10000 से अधिक लश्कर लेकर पंहुचा, रानी रूदा बाई के पास शाह ने अपने दूत के जरिये निकाह प्रस्ताव रखा,
रानी रुदाबाई ने महल के ऊपर छावणी बनाई थी जिसमे 2500 धर्धारी वीरांगनाये थी, जो रानी रूदा बाई का इशारा पाते ही लश्कर पर हमला करने को तैयार थी, सुलतान बेघारा को महल द्वार के अन्दर आने का न्यौता दिया गया।
सुल्तान बेघारा वासना मे अंधा होकर वैसा ही किया जैसे ही वो दुर्ग के अंदर आया राणी ने समय न गंवाते हुए सुल्तान बेघारा के सीने में खंजर उतार दिया और उधर छावनी से तीरों की वर्षा होने लगी जिससे शाह का लश्कर बचकर वापस नहीं जा पाया।
सुलतान बेघारा का सीना फाड़ कर रानी रुदाबाई ने कलेजा निकाल कर कर्णावती शहर के बीचोबीच लटकवा दिया।
और..उसके सर को धड से अलग करके पाटण राज्य के बिच टंगवा दिया साथ ही यह चेतावनी भी दी की कोई भी आक्रांता भारतवर्ष पर या हिन्दू नारी पर बुरी नज़र डालेगा तो उसका यही हाल होगा।
इस युद्ध के बाद रानी रुदाबाई ने राजपाठ सुरक्षित हाथों में सौंपकर कर जल समाधि ले ली, ताकि कोई भी तुर्क आक्रांता उन्हें अपवित्र न कर पाए।
ये देश नमन करता है रानी रुदाबाई को, गुजरात के लोग तो जानते होंगे इनके बारे में। ऐसे ही कोई क्षत्रिय और क्षत्राणी नहीं होता, हमारे पुर्वज और विरांगानाये ऐसा कर्म कर क्षत्रिय वंश का मान रखा है और धर्म बचाया है।
जय रक्त राजपुताना🚩🚩
Jay shree gopal
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