Kayakalp Yogdham
योग, आहार, आध्यात्मिक व चारित्रिक विकास पर सटीक व तथ्यों र आधारित जानकारी।
बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के लिए कीजिए यह अभ्यास।🙏🙏
30/06/2024
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।🙏🙏
जय जय श्री राधे कृष्णा 🙏
वृन्दावन में राधे राधे 🙏🙏
08/10/2022
29/09/2021
Kayakalp Yogdham - YouTube Yoga is a journey to the self through the self
30/06/2021
वर्षा ऋतु में आहार विहार
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ग्रीष्म ऋतु से क्षीण होती पाचन क्रिया वर्षा ऋतु में सबसे न्यून स्तर पर आ जाती है।अतः इन दिनों खान-पान पर विशेष ध्यान रखें।
इन दिनों जल क ई प्रकार से दूषित हो जाता है इसलिए पानी फिल्टर कर,उबाल कर या क्लोरीन की गोली द्वारा शुद्ध करके प्रयोग करें।
भोजन हमेशा हितभुक (हमारे लिए हितकर हो ),ऋतभुक (ऋतु के अनुसार), मितभुक (सीमित मात्रा में),को ध्यान में रखकर करें।
प्रभु द्वारा पूरी व्यवस्था की गई है हम जहाँ पर रहते हैं।वहाँ पर वही फल,सब्जियां, अन्न पैदा होता है जो हमारे लिए हितकर है।
लेकिन हम बिना मौसम का, दूसरे प्रदेश में पैदा हुए फलों, सब्जियों का प्रयोग अधिक करते हैं।अन्न के रूप में केवल गेहूं व चावल ही खाते हैं।
इसलिए जल्दी-जल्दी बिमार होते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग स्थानीय फल,सब्जियों ,गेहूं, ज्वार, बाजरा,मक्का, जौ, रागी का भरपूर मात्रा में प्रयोग करते हैं।इसलिए स्वस्थ रहते हैं।
वर्षा ऋतु में क्या खाएं क्या न खाएं :---
1. फलों में आम,जामुन, लीची, मौसमी, आलुबुखारे,इत्यादि का भरपूर सेवन करें।
2. नींबू, आँवला, अंकुरित अनाज, टमाटर, अदरक,लहसुन, गर्म मसालों का उचित मात्रा में प्रयोग करें।
2. करेला, हरी पत्तेदार सब्जियां, तलाहुआ, बासी भोजन, बाजार का बना भोजन, खुले में बिकने वाले कटे फल,
फास्टफूड,कोल्डड्रिंक, लस्सी, दही, गरीष्ट भोजन, देर से पचने वाला भोजन, मूली,मांस, मछली आदि का सेवन न करें।
3. इन दिनों वात कुपित होता है इसलिए वायु विकार बढाने वाला भोजन न करें।
जैसे:--तलाहुआ भोजन, बासी भोजन, फास्टफूड, लस्सी, हरी पत्तेदार सब्जियां...इत्यादि।
वर्षा ऋतु शुरू होते ही अधिकतर लोगों को उल्टी, दस्त,सर्दी, जुकाम, खाँसी, बुखार इत्यादि रोग हो जाते हैं।
और हम तुरंत डॉक्टर से दवा लेकर इन्हें रोक देते हैं।जो आगे चलकर भयंकर रोग का कारण बनते हैं।
योग में हम इन रोगों को स्वभाविक शुद्धि क्रियाएं कहते हैं।
यह शरीर में संचित मल को बाहर निकालने के लिए आते हैं।
योग साधक ऋतु परिवर्तन के समय नेति,कुन्जल शंखप्रक्षालन द्वारा शरीर में संचित मल को बाहर निकाल देते हैं।इसलिए इन रोगों से बचे रहते हैं।
अपने जीवन को सरल, सुखद व स्वस्थ बनाए रखने के लिए आज से ही योग से जुड़े।
मौसम की पहली बरसात में न नहाएं।
02/06/2021
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