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Shree Krishna | श्री कृष्ण और बलराम मिले कारगर में देवकी और वासुदेव से | Episode 040 | PART 07

श्रीकृष्णा,  रामानंद सागर द्वारा निर्देशित एक भारतीय टेलीविजन धारावाहिक है। मूल रूप से इस श्रृंखला का दूरदर्शन पर साप्ताहिक प्रसारण किया जाता था। यह धारावाहिक कृष्ण के जीवन से सम्बंधित कहानियों पर आधारित है। गर्ग संहिता ,  पद्म पुराण ,  ब्रह्मवैवर्त पुराण अग्नि पुराण,  हरिवंश पुराण ,  महाभारत ,  भागवत पुराण ,  भगवद्गीता आदि पर बना धारावाहिक है सीरियल की पटकथा,  स्क्रिप्ट एवं काव्य में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ विष्णु विराट जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सर्वप्रथम दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित 1993 को किया गया था जो 1996 तक चला,  221 एपिसोड का यह धारावाहिक बाद में दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर टेलीकास्ट हुआ,  रामायण व महाभारत के बाद इसने टी आर पी के मामले में इसने दोनों धारावाहिकों को पीछे छोड़ दिया था, इसका पुनः जनता की मांग पर प्रसारण कोरोना महामारी 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण श्रृंखला समाप्त होने के बाद ०३ मई से डीडी नेशनल पर किया जा रहा है,  TRP के मामले में २१ वें हफ्ते तक यह सीरियल नम्बर १ पर कायम रहा। 

Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar
निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर
Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar
निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर
Chief Asst. Director - Yogee Yogindar
मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर
Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar
सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर
Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar
पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर
Camera - Avinash Satoskar
कैमरा - अविनाश सतोसकर
Music - Ravindra Jain
संगीत - रविंद्र जैन
Lyrics - Ramanand Sagar 
गीत -  रामानन्द सागर 
Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil
पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील
Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev
संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव 25/08/2025

Shree Krishna | श्री कृष्ण और बलराम मिले कारगर में देवकी और वासुदेव से | Episode 040 | PART 07 श्रीकृष्णा, रामानंद सागर द्वारा निर्देशित एक भारतीय टेलीविजन धारावाहिक है। मूल रूप से इस श्रृंखला का दूरदर्शन पर साप्ताहिक प्रसारण किया जाता था। यह धारावाहिक कृष्ण के जीवन से सम्बंधित कहानियों पर आधारित है। गर्ग संहिता , पद्म पुराण , ब्रह्मवैवर्त पुराण अग्नि पुराण, हरिवंश पुराण , महाभारत , भागवत पुराण , भगवद्गीता आदि पर बना धारावाहिक है सीरियल की पटकथा, स्क्रिप्ट एवं काव्य में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ विष्णु विराट जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सर्वप्रथम दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित 1993 को किया गया था जो 1996 तक चला, 221 एपिसोड का यह धारावाहिक बाद में दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर टेलीकास्ट हुआ, रामायण व महाभारत के बाद इसने टी आर पी के मामले में इसने दोनों धारावाहिकों को पीछे छोड़ दिया था, इसका पुनः जनता की मांग पर प्रसारण कोरोना महामारी 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण श्रृंखला समाप्त होने के बाद ०३ मई से डीडी नेशनल पर किया जा रहा है, TRP के मामले में २१ वें हफ्ते तक यह सीरियल नम्बर १ पर कायम रहा। Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर Chief Asst. Director - Yogee Yogindar मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर Camera - Avinash Satoskar कैमरा - अविनाश सतोसकर Music - Ravindra Jain संगीत - रविंद्र जैन Lyrics - Ramanand Sagar गीत - रामानन्द सागर Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव

सारी नगरी की काया पलट गयी रे | श्री कृष्णा | गीत संवाद 

श्री कृष्णा गीत-संवाद के इस प्रसंग में द्वारिका से वृंदापुरी लौटने पर सुदामा को चमत्कार ही चमत्कार दिखते है, सारी वृंदापुरी द्वारिका की तरह भव्य हो चुकी होती है। वृंदापुरी वासियों के द्वारा उसका भव्य स्वागत किया जाता है। वह अपनी पत्नी और बच्चों के मिलकर अति प्रसन्न होता है और कभी सुदामा के साथ अन्याय और अत्याचार करने वाला वृंदापुरी का राजा भी स्वयं उसके चरणों पर गिर कर क्षमा माँगता है। गीत-संवाद के माध्यम से श्री कृष्ण की कृपा से वृंदापुरी के भाग्य बदलने का सुन्दर वर्णन किया गया है।
हर द्वारे से निर्धनता हट गई रे
हर द्वारे से निर्धनता हट गई रे
हर आँगन की काया पलट गई रे
हर आँगन की काया पलट गई रे
दुखःदायक की छाया सिमट गई रे
दुखःदायक की छाया सिमट गई रे
सारी नगरी की काया पलट गई रे
सारी नगरी की काया पलट गई रे

द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में जन्मे श्रीकृष्ण की लीलायें व उनके द्वारा महाभारत युद्ध में अर्जुन को दिये गये उपदेश, जिन्हें ऋषि वेद व्यास जी ने श्रीमद् भगवद् गीता के रूप में संस्कृत भाषा में संकलित किया था, जिसकी लोकप्रियता विश्वविख्यात है। उन लीलाओं और उपदेशों के भावों को सरल भाषा में गीत-संगीत के माध्यम से और सशक्त बना जन-मानस तक पहुँचाने के लिए रामानंद सागर ने महान धारावाहिक श्रीकृष्णा का निर्माण किया। जिसके प्रसंगो को रविन्द्र जैन ने मधुर गीत-संगीत से लयवद्ध कर भावों की अभिव्यक्ति को आनन्दमय बना दिया। “तिलक” अपने इस नये संकलन “गीत-संवाद” में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े व श्रीमद् भगवद् गीता के अनेक काव्यबद्ध प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये। 24/08/2025

सारी नगरी की काया पलट गयी रे | श्री कृष्णा | गीत संवाद श्री कृष्णा गीत-संवाद के इस प्रसंग में द्वारिका से वृंदापुरी लौटने पर सुदामा को चमत्कार ही चमत्कार दिखते है, सारी वृंदापुरी द्वारिका की तरह भव्य हो चुकी होती है। वृंदापुरी वासियों के द्वारा उसका भव्य स्वागत किया जाता है। वह अपनी पत्नी और बच्चों के मिलकर अति प्रसन्न होता है और कभी सुदामा के साथ अन्याय और अत्याचार करने वाला वृंदापुरी का राजा भी स्वयं उसके चरणों पर गिर कर क्षमा माँगता है। गीत-संवाद के माध्यम से श्री कृष्ण की कृपा से वृंदापुरी के भाग्य बदलने का सुन्दर वर्णन किया गया है। हर द्वारे से निर्धनता हट गई रे हर द्वारे से निर्धनता हट गई रे हर आँगन की काया पलट गई रे हर आँगन की काया पलट गई रे दुखःदायक की छाया सिमट गई रे दुखःदायक की छाया सिमट गई रे सारी नगरी की काया पलट गई रे सारी नगरी की काया पलट गई रे द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में जन्मे श्रीकृष्ण की लीलायें व उनके द्वारा महाभारत युद्ध में अर्जुन को दिये गये उपदेश, जिन्हें ऋषि वेद व्यास जी ने श्रीमद् भगवद् गीता के रूप में संस्कृत भाषा में संकलित किया था, जिसकी लोकप्रियता विश्वविख्यात है। उन लीलाओं और उपदेशों के भावों को सरल भाषा में गीत-संगीत के माध्यम से और सशक्त बना जन-मानस तक पहुँचाने के लिए रामानंद सागर ने महान धारावाहिक श्रीकृष्णा का निर्माण किया। जिसके प्रसंगो को रविन्द्र जैन ने मधुर गीत-संगीत से लयवद्ध कर भावों की अभिव्यक्ति को आनन्दमय बना दिया। “तिलक” अपने इस नये संकलन “गीत-संवाद” में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े व श्रीमद् भगवद् गीता के अनेक काव्यबद्ध प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।

मित्र सुदामा की सहायता करने के लिए श्री कृष्ण ने मुरली मनोहर का रूप धारण किया | श्री कृष्ण | दिव्य कथाएँ 

जंगलों के काँटों और पर्वतों के पथरीले मार्गों पर भूखे-प्यासे, नंगे पाँव चलते सुदामा द्वारका की ओर बढ़ते रहते हैं। उनकी थकी देह को देख रुक्मिणी श्रीकृष्ण से कहती है कि इस तरह तो आपका मित्र कभी भी हिम्मत हार सकता है और फिर वो कभी द्वारिका नहीं पहुँच पाएगा। श्रीकृष्ण को रुक्मिणी का मर्म समझ में आ जाता है और सुदामा की सहायता करने के लिए मुरली मनोहर का वेश धारण करके उसके पास पहुँच जाते है। वेश बदलने के कारण सुदामा अपने प्रिय मित्र को पहचान नहीं पाते। मुरली मनोहर की मुरली की धुन सुनकर सुदामा उससे पूछते हैं कि तुमने यह धुन किससे सीखी है, श्रीकृष्ण भी ऐसी धुन बजाते थे। मुरली मनोहर बताते हैं कि वह भी द्वारिका के रहने वाले है और यह धुन श्रीकृष्ण की ही है। सुदामा बताते हैं कि मैं भी अपने प्रभु, अपने परम मित्र श्री कृष्ण से मिलने द्वारिका जा रहा हूँ। रास्ते में सुदामा के पाँव में कांटा चुभने पर मुरली मनोहर उसके कांटा निकालते हैं। मार्ग में मुरली मनोहर उनसे हँसी ठिठोली करते हैं और अपनी पत्नी की याद में गीत गुनगुनाते रहते है। मुरली मनोहर की बातों से तंग आकर सुदामा जब मार्ग में एक नदी पड़ती है, तो मुरली मनोहर के साथ नाव पर चलने से मना कर देते हैं। लेकिन श्रीकृष्ण की शपथ दिए जाने पर नाव में साथ चलने के लिए हो जाते है। सुदामा मुरली मनोहर से कहते हैं कि मुझे तुम कोई बहुरूपिया नजर आते हो और मेरा ध्यान श्रीकृष्ण की ओर से भटका रहे हो। मुरली मनोहर कहते हैं कि मैं तो अपनी पत्नी लक्ष्मी के ध्यान में मग्न हूँ। सुदामा उनसे पत्नी की ओर से चित्त हटाकर श्रीकृष्ण की भक्ति करने को कहते हैं। इस पर मुरली मनोहर कहते हैं कि आप अपने श्रीकृष्ण की भक्ति कीजिए और मुझे अपनी पत्नी लक्ष्मी का स्मरण करते हुए प्रेमगीत गाने दीजिए। नदी और खेत खलिहान पार करके वे दोनों रात्रि विश्राम के लिए एक खण्डहर में रुकते हैं। 

संसार में यदि मनुष्य को कर्म के साथ धर्म के सही सामंजस्य को समझना हो तो इसके लिए श्रीमद् भगवत गीता से बड़ा ग्रंथ नहीं हो सकता। यह ग्रंथ दिव्य है इसीलिए विश्व में सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले मनुष्य भी श्री मद् भगवत गीता और श्री कृष्ण के अनुयायी है। सनातन धर्म में श्री भगवान कृष्ण को सोलह कलाओं से पूर्ण अवतार माना गया है। मानव जीवन से जुड़े सभी प्रश्नो का उत्तर आपको श्रीकृष्ण के जीवन से मिल सकता है। श्री भगवत् गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद व उपदेशों का संकलन है। इन उपदेशों को आप अपने जीवन में समाहित कर परमात्मा से जुड़ सकते है। “तिलक” अपने संकलन “दिव्य कथाएं” के इस चरण में श्री कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये। 23/08/2025

मित्र सुदामा की सहायता करने के लिए श्री कृष्ण ने मुरली मनोहर का रूप धारण किया | श्री कृष्ण | दिव्य कथाएँ जंगलों के काँटों और पर्वतों के पथरीले मार्गों पर भूखे-प्यासे, नंगे पाँव चलते सुदामा द्वारका की ओर बढ़ते रहते हैं। उनकी थकी देह को देख रुक्मिणी श्रीकृष्ण से कहती है कि इस तरह तो आपका मित्र कभी भी हिम्मत हार सकता है और फिर वो कभी द्वारिका नहीं पहुँच पाएगा। श्रीकृष्ण को रुक्मिणी का मर्म समझ में आ जाता है और सुदामा की सहायता करने के लिए मुरली मनोहर का वेश धारण करके उसके पास पहुँच जाते है। वेश बदलने के कारण सुदामा अपने प्रिय मित्र को पहचान नहीं पाते। मुरली मनोहर की मुरली की धुन सुनकर सुदामा उससे पूछते हैं कि तुमने यह धुन किससे सीखी है, श्रीकृष्ण भी ऐसी धुन बजाते थे। मुरली मनोहर बताते हैं कि वह भी द्वारिका के रहने वाले है और यह धुन श्रीकृष्ण की ही है। सुदामा बताते हैं कि मैं भी अपने प्रभु, अपने परम मित्र श्री कृष्ण से मिलने द्वारिका जा रहा हूँ। रास्ते में सुदामा के पाँव में कांटा चुभने पर मुरली मनोहर उसके कांटा निकालते हैं। मार्ग में मुरली मनोहर उनसे हँसी ठिठोली करते हैं और अपनी पत्नी की याद में गीत गुनगुनाते रहते है। मुरली मनोहर की बातों से तंग आकर सुदामा जब मार्ग में एक नदी पड़ती है, तो मुरली मनोहर के साथ नाव पर चलने से मना कर देते हैं। लेकिन श्रीकृष्ण की शपथ दिए जाने पर नाव में साथ चलने के लिए हो जाते है। सुदामा मुरली मनोहर से कहते हैं कि मुझे तुम कोई बहुरूपिया नजर आते हो और मेरा ध्यान श्रीकृष्ण की ओर से भटका रहे हो। मुरली मनोहर कहते हैं कि मैं तो अपनी पत्नी लक्ष्मी के ध्यान में मग्न हूँ। सुदामा उनसे पत्नी की ओर से चित्त हटाकर श्रीकृष्ण की भक्ति करने को कहते हैं। इस पर मुरली मनोहर कहते हैं कि आप अपने श्रीकृष्ण की भक्ति कीजिए और मुझे अपनी पत्नी लक्ष्मी का स्मरण करते हुए प्रेमगीत गाने दीजिए। नदी और खेत खलिहान पार करके वे दोनों रात्रि विश्राम के लिए एक खण्डहर में रुकते हैं। संसार में यदि मनुष्य को कर्म के साथ धर्म के सही सामंजस्य को समझना हो तो इसके लिए श्रीमद् भगवत गीता से बड़ा ग्रंथ नहीं हो सकता। यह ग्रंथ दिव्य है इसीलिए विश्व में सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले मनुष्य भी श्री मद् भगवत गीता और श्री कृष्ण के अनुयायी है। सनातन धर्म में श्री भगवान कृष्ण को सोलह कलाओं से पूर्ण अवतार माना गया है। मानव जीवन से जुड़े सभी प्रश्नो का उत्तर आपको श्रीकृष्ण के जीवन से मिल सकता है। श्री भगवत् गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद व उपदेशों का संकलन है। इन उपदेशों को आप अपने जीवन में समाहित कर परमात्मा से जुड़ सकते है। “तिलक” अपने संकलन “दिव्य कथाएं” के इस चरण में श्री कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।

Shree Krishna | सुदामा ने मुरली मनोहर को भगवान की स्तुति गाने को कहा | Episode 105 | PART 03

श्रीकृष्णा,  रामानंद सागर द्वारा निर्देशित एक भारतीय टेलीविजन धारावाहिक है। मूल रूप से इस श्रृंखला का दूरदर्शन पर साप्ताहिक प्रसारण किया जाता था। यह धारावाहिक कृष्ण के जीवन से सम्बंधित कहानियों पर आधारित है। गर्ग संहिता ,  पद्म पुराण ,  ब्रह्मवैवर्त पुराण अग्नि पुराण,  हरिवंश पुराण ,  महाभारत ,  भागवत पुराण ,  भगवद्गीता आदि पर बना धारावाहिक है सीरियल की पटकथा,  स्क्रिप्ट एवं काव्य में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ विष्णु विराट जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सर्वप्रथम दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित 1993 को किया गया था जो 1996 तक चला,  221 एपिसोड का यह धारावाहिक बाद में दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर टेलीकास्ट हुआ,  रामायण व महाभारत के बाद इसने टी आर पी के मामले में इसने दोनों धारावाहिकों को पीछे छोड़ दिया था, इसका पुनः जनता की मांग पर प्रसारण कोरोना महामारी 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण श्रृंखला समाप्त होने के बाद ०३ मई से डीडी नेशनल पर किया जा रहा है,  TRP के मामले में २१ वें हफ्ते तक यह सीरियल नम्बर १ पर कायम रहा। 

Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar
निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर
Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar
निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर
Chief Asst. Director - Yogee Yogindar
मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर
Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar
सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर
Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar
पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर
Camera - Avinash Satoskar
कैमरा - अविनाश सतोसकर
Music - Ravindra Jain
संगीत - रविंद्र जैन
Lyrics - Ramanand Sagar 
गीत -  रामानन्द सागर 
Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil
पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील
Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev
संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव 22/08/2025

Shree Krishna | सुदामा ने मुरली मनोहर को भगवान की स्तुति गाने को कहा | Episode 105 | PART 03 श्रीकृष्णा, रामानंद सागर द्वारा निर्देशित एक भारतीय टेलीविजन धारावाहिक है। मूल रूप से इस श्रृंखला का दूरदर्शन पर साप्ताहिक प्रसारण किया जाता था। यह धारावाहिक कृष्ण के जीवन से सम्बंधित कहानियों पर आधारित है। गर्ग संहिता , पद्म पुराण , ब्रह्मवैवर्त पुराण अग्नि पुराण, हरिवंश पुराण , महाभारत , भागवत पुराण , भगवद्गीता आदि पर बना धारावाहिक है सीरियल की पटकथा, स्क्रिप्ट एवं काव्य में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ विष्णु विराट जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सर्वप्रथम दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित 1993 को किया गया था जो 1996 तक चला, 221 एपिसोड का यह धारावाहिक बाद में दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर टेलीकास्ट हुआ, रामायण व महाभारत के बाद इसने टी आर पी के मामले में इसने दोनों धारावाहिकों को पीछे छोड़ दिया था, इसका पुनः जनता की मांग पर प्रसारण कोरोना महामारी 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण श्रृंखला समाप्त होने के बाद ०३ मई से डीडी नेशनल पर किया जा रहा है, TRP के मामले में २१ वें हफ्ते तक यह सीरियल नम्बर १ पर कायम रहा। Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर Chief Asst. Director - Yogee Yogindar मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर Camera - Avinash Satoskar कैमरा - अविनाश सतोसकर Music - Ravindra Jain संगीत - रविंद्र जैन Lyrics - Ramanand Sagar गीत - रामानन्द सागर Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव

वसुंधरा के समझाने पर सुदामा राजा का गुणगान करने उनके महल पहुँचा | श्री कृष्ण | दिव्य कथाएँ

श्री कृष्ण अपने भक्त और मित्र सुदामा के गुणों का वर्णन अपनी पत्नियों से करते हुए कहते है कि वह दुविधा में फंस गया है, उसके मन में शंका भी है कि द्वारिकाधीश हो जाने के बाद मैं उसे पहचानूंगा भी या नहीं। जामवंती पूछती है कि क्या सुदामा की भक्ति में कुछ कमियाँ है? श्री कृष्ण कहते है कि सुदामा की भक्ति में संदेह नहीं किया जा सकता है। एक बार गुरु आश्रम में सुदामा ने मुझसे कहा था कि सच्चा मित्र वो होता है जो संकटकाल में मित्र की सहायता करें, तुम तो सहायता कर सकोगे लेकिन मैं गरीब ब्राह्मण नहीं। वही दूसरी ओर पालकी में सवार होकर चक्रधर सुदामा के घर पहुँचता है, जिसे देखकर बच्चे चहकने लगते है। चक्रधर वसुंधरा से कहता है कि यह सब उसे राजा के सामने विद्वत्ता का प्रदर्शन करके मिला है। सुदामा कहता है कि यह विद्वत्ता का प्रदर्शन करके नहीं, बल्कि राजा की चापलूसी से मिला है, अपनी कविताओं में राजा के उन गुणों का वर्णन करके, जो उनमें है ही नहीं। चक्रधर कहता है कि तुम्हारी इसी विचार धारा की वजह से इस घर की ऐसी हालत है। मुझसे अधिक विद्वान है, पूजा-पाठ से लाभ नहीं होगा, इसलिए मेरे साथ राजा के दरबार में चलकर उनका गुणगान करो। चक्रधर वसुंधरा से सुदामा को समझाने के लिए कह कर वहाँ से चला जाता है। चक्रधर के जाने के पश्चात वसुंधरा सुदामा को समझाती है कि अपनी जिह्वा का सदुपयोग राजा की प्रशंसा में करें। सुदामा कहता है यह ब्राह्मण की जिह्वा का दुरुपयोग है, क्योंकि ब्राह्मण का स्थान गुरु का स्थान होता है। जब सुदामा हर बात में धर्म की बातें करने लगता है, तो वसुंधरा बच्चों के मुरझाए हुए चेहरे की ओर देखते हुए पूछती है क्या वह अपने पति धर्म और पिता धर्म का पालन कर पा रहे है? सुदामा का वसुंधरा का अभिप्राय समझ में आ जाता है और वह अगले दिन चक्रधर के साथ राजा के महल में पहुँच जाता है। लेकिन वहाँ स्त्रियों के बीच धिरे राजा को मदिरापान करते देख सुदामा असहज हो जाता है। 

संसार में यदि मनुष्य को कर्म के साथ धर्म के सही सामंजस्य को समझना हो तो इसके लिए श्रीमद् भगवत गीता से बड़ा ग्रंथ नहीं हो सकता। यह ग्रंथ दिव्य है इसीलिए विश्व में सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले मनुष्य भी श्री मद् भगवत गीता और श्री कृष्ण के अनुयायी है। सनातन धर्म में श्री भगवान कृष्ण को सोलह कलाओं से पूर्ण अवतार माना गया है। मानव जीवन से जुड़े सभी प्रश्नो का उत्तर आपको श्रीकृष्ण के जीवन से मिल सकता है। श्री भगवत् गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद व उपदेशों का संकलन है। इन उपदेशों को आप अपने जीवन में समाहित कर परमात्मा से जुड़ सकते है। “तिलक” अपने संकलन “दिव्य कथाएं” के इस चरण में श्री कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये। 20/08/2025

वसुंधरा के समझाने पर सुदामा राजा का गुणगान करने उनके महल पहुँचा | श्री कृष्ण | दिव्य कथाएँ श्री कृष्ण अपने भक्त और मित्र सुदामा के गुणों का वर्णन अपनी पत्नियों से करते हुए कहते है कि वह दुविधा में फंस गया है, उसके मन में शंका भी है कि द्वारिकाधीश हो जाने के बाद मैं उसे पहचानूंगा भी या नहीं। जामवंती पूछती है कि क्या सुदामा की भक्ति में कुछ कमियाँ है? श्री कृष्ण कहते है कि सुदामा की भक्ति में संदेह नहीं किया जा सकता है। एक बार गुरु आश्रम में सुदामा ने मुझसे कहा था कि सच्चा मित्र वो होता है जो संकटकाल में मित्र की सहायता करें, तुम तो सहायता कर सकोगे लेकिन मैं गरीब ब्राह्मण नहीं। वही दूसरी ओर पालकी में सवार होकर चक्रधर सुदामा के घर पहुँचता है, जिसे देखकर बच्चे चहकने लगते है। चक्रधर वसुंधरा से कहता है कि यह सब उसे राजा के सामने विद्वत्ता का प्रदर्शन करके मिला है। सुदामा कहता है कि यह विद्वत्ता का प्रदर्शन करके नहीं, बल्कि राजा की चापलूसी से मिला है, अपनी कविताओं में राजा के उन गुणों का वर्णन करके, जो उनमें है ही नहीं। चक्रधर कहता है कि तुम्हारी इसी विचार धारा की वजह से इस घर की ऐसी हालत है। मुझसे अधिक विद्वान है, पूजा-पाठ से लाभ नहीं होगा, इसलिए मेरे साथ राजा के दरबार में चलकर उनका गुणगान करो। चक्रधर वसुंधरा से सुदामा को समझाने के लिए कह कर वहाँ से चला जाता है। चक्रधर के जाने के पश्चात वसुंधरा सुदामा को समझाती है कि अपनी जिह्वा का सदुपयोग राजा की प्रशंसा में करें। सुदामा कहता है यह ब्राह्मण की जिह्वा का दुरुपयोग है, क्योंकि ब्राह्मण का स्थान गुरु का स्थान होता है। जब सुदामा हर बात में धर्म की बातें करने लगता है, तो वसुंधरा बच्चों के मुरझाए हुए चेहरे की ओर देखते हुए पूछती है क्या वह अपने पति धर्म और पिता धर्म का पालन कर पा रहे है? सुदामा का वसुंधरा का अभिप्राय समझ में आ जाता है और वह अगले दिन चक्रधर के साथ राजा के महल में पहुँच जाता है। लेकिन वहाँ स्त्रियों के बीच धिरे राजा को मदिरापान करते देख सुदामा असहज हो जाता है। संसार में यदि मनुष्य को कर्म के साथ धर्म के सही सामंजस्य को समझना हो तो इसके लिए श्रीमद् भगवत गीता से बड़ा ग्रंथ नहीं हो सकता। यह ग्रंथ दिव्य है इसीलिए विश्व में सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले मनुष्य भी श्री मद् भगवत गीता और श्री कृष्ण के अनुयायी है। सनातन धर्म में श्री भगवान कृष्ण को सोलह कलाओं से पूर्ण अवतार माना गया है। मानव जीवन से जुड़े सभी प्रश्नो का उत्तर आपको श्रीकृष्ण के जीवन से मिल सकता है। श्री भगवत् गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद व उपदेशों का संकलन है। इन उपदेशों को आप अपने जीवन में समाहित कर परमात्मा से जुड़ सकते है। “तिलक” अपने संकलन “दिव्य कथाएं” के इस चरण में श्री कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।

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