sashi_dass
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09/02/2026
संत रामपाल जी महाराज जी के बोध दिवस के उपलक्ष्य में 15, 16, व 17 फरवरी 2026 को विशाल भंडारा और सत्संग का आयोजन किया जा रहा है
जिसमें आप सभी परिवार सहित सादर आमंत्रित है ।।
#निमंत्रण_संसारको_सम्मानकेसाथ
03/06/2025
अल्लाह की सही जानकारी तो बाखबर संत रामपाल जी महाराज ही दे रहे हैं.....
14/02/2025
💯💞
"कर्ज" लेकर महंगी शादी, चमकदार बड़े-बड़े टेंट, और 1 दिन के लिए बारात में 20 गाड़ियां, डीजे, ढोल, ताशे बजाने से कोई आपको अंबानी नहीं समझने लगेगा...
1 दिन शेरवानी और घोड़े पर बैठकर नकली राजा बनने के लिए आपको कई सालों तक खच्चर बनकर काम करना पड़ेगा...
विवाह और शादी समारोह को सिंपल साधे तरीके से करें!
दहेज लेने देने से परहेज करें दिखावटी दुनिया से बाहर निकले और हकीकत का सामना करें !! अगर भविष्य मे तनाव मुक्त जीवन जीना है तो कर्ज लेकर" घी " पीना बन्द करे।
एक संकल्प जरूर करे-
न तो कर्ज वाली बहु लायेंगे और न ही कर्ज वाली बेटी देंगे ।
शादी को आसान बनाए 🙏
🥰🥰🥰😍😍😍😍
Satlok Ashram
Gajjab ka najara
Satlok Ashram
05/10/2024
News:- राजस्थान के डिप्टी सीएम प्रेमचंद्र बैरवा के बेटे का 18 साल से कम उम्र में गाड़ी चलाने पर चालान काटा गया है। साथ ही आरटीओ ने बिना सीट बेल्ट लगाए गाड़ी चलाने, गाड़ी में बिना मंजूरी लिए मॉडिफिकेशन करने और कम्यूनिकेशन डिवाइस हाथ में लेकर खतरनाक तरीके से ड्राइविंग करने का दोषी माना है। शुक्रवार शाम 7000 रुपए का चालान बैरवा के घर भेजा गया है। करीब एक सप्ताह पहले सोशल मीडिया पर डिप्टी सीएम के बेटे और उसके दोस्तों का कार चलाने, रील बनाने का वीडियो सामने आया था। वीडियो सामने आने के बाद डिप्टी सीएम बैरवा ने इस मामले में सफाई देते हुए अपने बच्चे का बचाव किया था। इसके बाद मामला उच्च स्तर तक चर्चाओं में आ गया था।
#राजस्थान
#न्यूज
21/08/2024
तू घर जाना चाहती है... जा.. तेरी नाक काट देता हूं...
हरदोई में अनीता अपने भाई को राखी बांधने के लिए मायके जाना चाहती थी। पति राहुल ने मना किया तो दोनों में झगड़ा हो गया। राहुल ने अनीता को मारा पीटा और अंत में उसकी नाक काट दी।
#राजस्थान
21/08/2024
News:- SC-ST के आरक्षण में क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कार्ट के फैसले के विरोध में बुधवार को भारत बंद का आह्वान किया गया। राजस्थान में बंद को कांग्रेस ने भी समर्थन दिया है। जयपुर, सीकर, अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर, डीग, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, टोंक, भीलवाड़ा, नीमकाथाना, कोटा, श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़ और भरतपुर में स्कूल-कॉलेजों के साथ समस्त शैक्षणिक संस्थाओं में छुट्टी की घोषणा कर दी। कोटा, शेखावाटी और मत्स्य यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई। भरतपुर में संभागीय आयुक्त सांवरमल वर्मा ने सुबह 9 से शाम 6 बजे तक इंटरनेट बंद कर दिया। जयपुर के कई व्यापारिक संगठन भी बंद के साथ हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति संयुक्त संघर्ष समिति ने बंद की सफलता के लिए टीमें भी बनाई हैं। बंद का लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता इस लड़ाई में साथ हैं। वहीं, भाजपा नेता किरोड़ीलाल ने इसे बेतुका बंद बताया है।
#राजस्थान
#न्यूज
19/08/2024
#हिन्दूसाहेबान_नहींसमझे_गीतावेदपुराणPart72 के आगे पढिए.....)
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#हिन्दूसाहेबान_नहींसमझे_गीतावेदपुराणPart73
"पवित्र वेदों में कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर का प्रमाण"
(पवित्र वेदों में प्रवेश से पहले) part -C
प्रमाण :- ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 54 मंत्र 3 में कहा है कि परमेश्वर सबसे ऊपर लोक में विराजमान है :-
प्रमाण के लिए देखें यह फोटोकॉपी इस मंत्र की जिसका अनुवाद आर्यसमाज के अनुवादकों ने किया है :-
(प्रमाण ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सुक्त 54 मन्त्र 3)
अ॒यं विश्ववा॑नि तिष्ठति पुनानो चुर्वनोपरिं । सोमों दुवो न सूर्यः ॥३॥
पदार्थः (सूर्यः, न) सूर्य के समान जगत्प्रेरक (अयम्) यह परमात्मा (सोमः, देवः) सौम्य स्वभाव वाला और जगत्प्रकाशक है और (विश्वानि, पुनानः) सब लोकों को पवित्र करता हुआ (भुवतोपरि, तिष्ठति सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों के ऊध्वं भाग में भी वर्तमान है ।।३।।
विवेचन : ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 54 मन्त्र 3 की फोटोकापी में आप देखें, इसका अनुवाद आर्यसमाज के विद्वानों ने किया है। उनके अनुवाद में भी स्पष्ट है कि वह परमात्मा (भुवनोपरि) सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों के ऊर्ध्व अर्थात् ऊपर (तिष्ठति) विराजमान है, ऊपर बैठा है।
इसका यथार्थ अनुवाद इस प्रकार है :-
(अयं) यह (सोमः देव) अमर परमेश्वर (सूर्यः) सूर्य के (न) समान (विश्वानि) सर्व को (पुनानः) पवित्र करता हुआ (भुवनोपरि) सर्व ब्रह्माण्डों के ऊर्ध्व अर्थात् ऊपर (तिष्ठति) बैठा है।
भावार्थ :- जैसे सूर्य ऊपर है और अपना प्रकाश तथा उष्णता से सर्व को लाभ दे रहा है। इसी प्रकार यह अमर परमेश्वर जिसका ऊपर के मंत्र में वर्णन किया है, सर्व ब्रह्माण्डों के ऊपर बैठा है।
(प्रमाण ऋग्वेद मण्डल नं. 9 सुक्त 86 मन्त्र 26)
इन्दुः पुनानो अति॑ि गाहते मृषो विश्र्थानि कृण्वन्त्सुपथर्थानि यज्य॑वे । गाः कुंश्वानो निर्णिजे हर्यतः कृबिरत्यो न कोळन्परि वारंमर्षति ॥२६॥
पदार्थः (यज्ये) यज्ञ करने वाले यजमानों के लिए परमात्मा (विश्वानि सुपधानि) सब रास्तों को (कृण्वन्) सुगम करता हुया (मृषः) उनके विघ्नों को (अतिगाहते) मद्दन करता है और (पुनानः) उनको पवित्र करता हुआा और (निनिज) अपने रूप को (गाः कृण्यानः) सरल करता हुआ (हस्यंतः) वह कान्तिमय परमात्मा (कविः सर्वश (अत्योन) विद्यत् के समान (क्रीळम्) क्रीड़ा करता हुआा (वारं) वरणीय पुरुष को (पयंर्षति) प्राप्त होता है ॥२६॥
* विवेचन : यह फोटोकापी ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मन्त्र 26 की है जो आर्यसमाज के आचार्यों व महर्षि दयानन्द के चेलों द्वारा अनुवादित है जिसमें स्पष्ट है कि यज्ञ करने वाले अर्थात् धार्मिक अनुष्ठान करने वाले यजमानों अर्थात् भक्तों के लिए परमात्मा, सब रास्तों को सुगम करता हुआ अर्थात् जीवन रूपी सफर के मार्ग को दुःखों रहित करके सुगम बनाता हुआ। उनके विघ्नों अर्थात् संकटों का मर्दन करता है अर्थात् समाप्त करता है। भक्तों को पवित्र अर्थात् पाप रहित, विकार रहित करता है। जैसा की अगले मन्त्र 27 में कहा है कि "जो परमात्मा धूलोक अर्थात् सत्यलोक के तीसरे पृष्ठ पर विराजमान है, वहाँ पर परमात्मा के शरीर का प्रकाश बहुत अधिक है।"
उदाहरण के लिए परमात्मा के एक रोम (शरीर के बाल) का प्रकाश करोड़ सूर्य तथा इतने ही चन्द्रमाओं के मिले-जुले प्रकाश से भी अधिक है। यदि वह परमात्मा उसी प्रकाश युक्त शरीर से पृथ्वी पर प्रकट हो जाए तो हमारी चर्म दृष्टि उन्हें देख नहीं सकती। जैसे उल्लु पक्षी दिन में सूर्य के प्रकाश के कारण कुछ भी नहीं देख पाता है। यही दशा मनुष्यों की हो जाए। इसलिए वह परमात्मा अपने रूप अर्थात् शरीर के प्रकाश को सरल करता हुआ उस स्थान से जहाँ परमात्मा ऊपर रहता है, वहाँ से गति करके बिजली के समान क्रीड़ा अर्थात् लीला करता हुआ चलकर आता है, श्रेष्ठ पुरूषों को मिलता है। यह भी स्पष्ट है कि आप कविः अर्थात् कविर्देव हैं। हम उन्हें कबीर साहेब कहते हैं।
विवेचन यह फोटोकापी ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 के मन्त्र 27 की है। इसमें स्पष्ट है कि "परमात्मा धूलोक अर्थात् अमर लोक के तीसरे पृष्ठ अर्थात् भाग पर विराजमान है। सत्यलोक अर्थात् शाश्वत् स्थान के तीन भाग हैं। एक भाग में वन-पहाड़-झरने, बाग-बगीचे आदि हैं। यह बाह्य भाग है अर्थात् बाहरी भाग है। (जैसे भारत की राजधानी दिल्ली भी तीन भागों में बँटी है। बाहरी दिल्ली जिसमें गाँव खेत-खलिहान और नहरें हैं, दूसरा बाजार बना है। तीसरा संसद भवन तथा कार्यालय हैं।)
इसके पश्चात् धूलोक में बस्तियाँ हैं। सपरिवार मोक्ष प्राप्त हंसात्माऐं रहती हैं। (पृथ्वी पर जैसे भक्त को भक्तात्मा कहते हैं, इसी प्रकार सत्यलोक में हंसात्मा कहलाते हैं।) (3) तीसरे भाग में सर्वोपरि परमात्मा का सिंहासन है। उसके आस-पास केवल नर आत्माऐं रहती हैं, वहाँ स्त्री-पुरूष का जोड़ा नहीं है। वे यदि अपना परिवार चाहते हैं तो शब्द (वचन) से केवल पुत्र उत्पन्न कर लेते हैं।
इस प्रकार शाश्वत् स्थान अर्थात् सत्यलोक तीन भागों में परमात्मा ने बाँट रखा है। वहाँ यानि सत्यलोक में प्रत्येक स्थान पर रहने वालों में वृद्धावस्था नहीं है, वहाँ मृत्यु नहीं है। इसीलिए गीता अध्याय 7 श्लोक 29 में कहा है कि जो जरा अर्थात् वृद्ध अवस्था तथा मरण अर्थात् मृत्यु से छूटने का प्रयत्न करते हैं, वे तत् ब्रह्म अर्थात् परम अक्षर ब्रह्म को जानते हैं। सत्यलोक में सत्यपुरूष रहता है, वहाँ पर जरा-मरण नहीं है, बच्चे युवा होकर सदा युवा रहते हैं।
विवेचन : ऊपर ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मन्त्र 1-2 की फोटोकापी हैं, यह अनुवाद महर्षि दयानन्द जी के दिशा-निर्देश से उन्हीं के चेलों ने किया है और सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली से प्रकाशित है।
यह अनुवाद महर्षि दयानन्द जी के दिशा-निर्देश से उन्हीं के चेलों ने किया है और सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली से प्रकाशित है।
इनमें स्पष्ट है कि मन्त्र 1 में कहा है "सर्व की उत्पत्ति करने वाला परमात्मा तेजोमय शरीर युक्त है, पापों को नाश करने वाला और सुखों की वर्षा करने वाला अर्थात् सुखों की झड़ी लगाने वाला है, वह ऊपर सत्यलोक में सिंहासन पर बैठा है जो देखने में राजा के समान है।
यही प्रमाण सूक्ष्मवेद में है कि :-
अर्श कुर्श पर सफेद गुमट है, जहाँ परमेश्वर का डेरा।
श्वेत छत्र सिर मुकुट विराजे, देखत न उस चेहरे नूं ।।
यही प्रमाण बाईबल ग्रन्थ तथा कुर्भान् शरीफ में है कि परमात्मा ने छः दिन में सृष्टि रची और सातवें दिन ऊपर आकाश में तख्त अर्थात् सिंहासन पर जा विराजा। (बाईबल के उत्पत्ति ग्रन्थ 2/26-30 तथा कुर्भान् शरीफ की सुर्त "फुर्कानि 25 आयत 52 से 59 में है।)
वह परमात्मा अपने अमर धाम से चलकर पृथ्वी पर शब्द वाणी से ज्ञान सुनाता है। वह वर्षीय अर्थात् आदरणीय श्रेष्ठ व्यक्तियों को प्राप्त होता है, उनको मिलता है। [जैसे 1. सन्त धर्मदास जी बांधवगढ (मध्य प्रदेश वाले को मिले) 2. सन्त मलूक दास जी को मिले, 3. सन्त दादू दास जी को आमेर (राजस्थान) में मिले 4. सन्त नानक देव जी को मिले 5. सन्त गरीब दास जी गाँव छुड़ानी जिला झज्जर हरियाणा वाले को मिले 6 सन्त घीसा दास जी गाँव खेखड़ा जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) वाले को मिले 7. सन्त जम्भेश्वर जी (बिश्नोई धर्म के प्रवर्तक) को गाँव समराथल राजस्थान वाले को मिले] वह परमात्मा अच्छी आत्माओं को मिलते हैं। जो परमात्मा के दृढ़ भक्त होते हैं, उन पर परमात्मा का विशेष आकर्षण होता है। उदाहरण भी बताया है कि जैसे विद्युत अर्थात् आकाशीय बिजली स्नेह वाले स्थानों को आधार बनाकर गिरती है। जैसे कांसी धातु पर बिजली गिरती है, पहले कांसी धातु के कटोरे, गिलास-थाली, बेले आदि-आदि होते थे। वर्षा के समय तुरन्त उठाकर घर के अन्दर रखा करते थे। वृद्ध कहते थे कि कांसी के बर्तन पर बिजली अमूमन गिरती है, इसी प्रकार परमात्मा अपने प्रिय भक्तों पर आकर्षित होकर मिलते हैं।
मन्त्र नं. 2 में तो यह भी स्पष्ट किया है कि परमात्मा उन अच्छी आत्माओं को उपदेश करने की इच्छा से स्वयं महापुरूषों को मिलते हैं। उपदेश का भावार्थ है कि परमात्मा तत्वज्ञान बताकर उनको दीक्षा भी देते हैं। उनके सतगुरू भी स्वयं परमात्मा होते हैं। यह भी स्पष्ट किया है कि परमात्मा अत्यन्त गतिशील पदार्थ अर्थात् बिजली के समान तीव्रगामी होकर हमारे धार्मिक अनुष्ठानों में आप पहुँचते हैं। सन्त धर्मदास जी को परमात्मा ने यही कहा था कि मैं वहाँ पर अवश्य जाता हूँ जहाँ धार्मिक अनुष्ठान होते हैं क्योंकि मेरी अनुपस्थिति में काल कुछ भी उपद्रव कर देता है। जिससे साधकों की आस्था परमात्मा से छूट जाती है। मेरे रहते वह ऐसी गड़बड़ नहीं कर सकता। इसीलिए गीता अध्याय 3 श्लोक 15 में कहा है कि वह अविनाशी परमात्मा जिसने ब्रह्म को भी उत्पन्न किया, सदा ही यज्ञों में प्रतिष्ठित है अर्थात् धार्मिक अनुष्ठानों में उसी को इष्ट रूप में मानकर आरती स्तुति करनी चाहिए।
इस ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मन्त्र 2 में यह भी स्पष्ट किया है कि आप (कविर्वेधस्य) कविर्देव है जो सर्व को उपदेश देने की इच्छा से आते हो, आप पवित्र परमात्मा हैं। हमारे पापों को छुड़वाकर अर्थात् नाश करके हे अमर परमात्मा! आप हम को सुःख दें और (द्युतम् वसानः निर्निजम् परियसि) हम आप की सन्तान हैं। हमारे प्रति वह वात्सल्य वाला प्रेम भाव उत्पन्न करते हुए उसी (निर्निजम्) सुन्दर रूप को (परियासि) उत्पन्न करें अर्थात् हमारे को अपने बच्चे जानकर जैसे पहले और जब चाहें तब आप अपनी प्यारी आत्माओं को प्रकट होकर मिलते हैं, उसी तरह हमें भी दर्शन दें।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 के मंत्र 16 में कहा है कि हे परमात्मन् ! आप अपने श्रेष्ठ गुप्त नाम का ज्ञान कराऐं। उस नाम को मंत्र 17 में बताया है कि वह कविः यानि कविर्देव है।
मंत्र 17 की केवल हिन्दी (शिशुम् जज्ञानम् हर्यन्तम्) परमेश्वर जान-बूझकर तत्वज्ञान बताने के उद्देश्य से शिशु रूप में प्रकट होता है, उनके ज्ञान को सुनकर (मरुतो गणेन) भक्तों का बहुत बड़ा समूह उस परमात्मा का अनुयाई बन जाता है। (मृजन्ति शुम्यन्ति वहिन्) वह ज्ञान बुद्धिजीवी लोगों को समझ आता है, वे उस परमेश्वर की स्तुति भक्ति तत्वज्ञान के आधार से करते हैं, वह भक्ति (वहिन्) शीघ्र लाभ देने वाली होती है। वह परमात्मा अपने तत्वज्ञान को (काव्येना) कवित्व से अर्थात् कवियों की तरह दोहों, शब्दों, लोकोक्तियों, चौपाईयों द्वारा (कविर् गीर्भिः) कविर् वाणी द्वारा अर्थात् कबीर वाणी द्वारा (पवित्रम् अतिरेभन्) शुद्ध ज्ञान को उच्चे स्वर में गर्ज गर्जकर बोलते हैं। वह (कविः) कवि की तरह आचरण करने वाला कविर्देव (सन्त्) सन्त रूप में प्रकट (सोम) अमर परमात्मा होता है। (ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मन्त्र 17)
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