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: *दाद के लिए घरेलू नुस्खा*--
तुलसी के पत्तों को नींबू के साथ पीसें यानी चटनी जैसा बना लें इसे 15 दिन तक लगातार लगाने से दाद ठीक होता है ।
दाद का उपचार:-1.दाद पर अनार के पत्तो को पीसकर लगाने से लाभ होता है। 2.केले के गुदे में नींबू का रस मिलाकर लगाने से दाद ठीक होता है। 3. अजवायन को गर्म पानी में पीसकर लेप करने से एक सप्ताह में दाद ठीक हो जाता है। 4. नीम के पत्तों को दही के साथ पीसकर लगाने से दाद जड़ से साफ हो जाता है। 5.कैसा भी चर्म रोग हो तो सुबह बासी थूक लगाने से ठीक होता है।
03/02/2024
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*आई फ्लू,आंखों में जलन, पानी आना, लालिमा के लिए घरेलू नुस्खा*-
अभी आई फ्लू बहुत फैल रहा है इसलिए आंखों का ध्यान रखें।
1. नीम की कुछ पत्तियों को उबालें, पानी को पूरी तरह से ठंडा होने दें और फिर अपनी आंखों को धोने के लिए इसका इस्तेमाल करें। यह आंखों में किसी भी तरह की जलन, थकान या लालिमा में मदद करेगा।
2. तुलसी के पत्तों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दें। अगली सुबह इस पानी से आंखों को धोएं। नियमित रूप से कुछ दिनों तक ऐसा करने से आपको काफी लाभ होगा।
3. आंखों के इंफेक्शन से बचाव के लिए आप गुनगुने पानी में एक चुटकी हल्दी पाउडर डालकर मिक्स कर लें। अब इस पानी में कॉटन पैड को भिगोएं और इससे अपनी आंखों को पोंछें। इससे आंखों के आसपास मौजूद गंदगी साफ हो जाएगी और संक्रमण से बचाव में मदद मिलेगी।
4. हमेशा पर्याप्त रौशनी में पढ़ें, जिससे आंखे प्रभावित नहीं होती हों।
5. काला चश्मा पहन कर रखें। मोबाइल,टीवी नहीं देखें। बार बार आंखों पर हाथ नहीं लगाएं।
19/07/2023
#माइकल_जैक्सन 150 #साल जीना चाहता था!
किसी सेे हाथ मिलाने से पहले दस्ताने
पहनता था!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क
लगाता था !
अपनी देखरेख करने के लिए उसने अपने घर पर 12 #डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की #जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका #खाना लैबोरेट्री में #चेक होने के बाद उसे खिलाया जाता था!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!
माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक #सर्जरी करवाकर
अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी छोड़ दिया।
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
#किराए पर लिया! और अपने दोस्त भी गोरे बनाए शादी भी गोरी औरतों के साथ की!
नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो से विवाह किया, जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997) तथा पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को जन्म दिया। वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर चल रहा था!
हमेशा #ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले #डोनर भी तैयार कर रखे थे!
जिन्हें वह खर्चा देता था, ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत पड़ने पर वह आकर दे दें,
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की बदौलत मौत को भी #चकमा दे सकता है,
लेकिन वह गलत साबित हुआ।
25 जून 2009 को उसके दिल की #धड़कन
रुकने लगी, उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी में हालत काबू में नहीं आए, सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए, वह भी उसे नहीं #बचा पाए।
उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी , 50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था और 25 जून 2009 को वह इस दुनिया से #चला गया !
जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था! उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का #पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि, उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!
उसका सिर गंजा था, उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे, उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे,
प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से
छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!
माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 #अरब लोगो ने #लाइव_देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।
माइकल जैक्सन की #मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर,
Wikipedia,Twitter और AOL’s
instant messenger यह सभी #क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलते ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने माइकल जैकसन को सर्च किया! ज्यादा सर्च होने के कारण #गूगल पर सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और गूगल क्रैश हो गया,
ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!
सार यही है,
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग कुदरती मौत की बजाय बनावटी मौत ही मरते हैं!
"क्यों करते हो #गुरुर अपने चार दिन के #ठाठ पर ,
मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे #घाट पर"...
धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"
आइए ज़िंदगी को पकड़ें,
इससे पहले कि,
जिंदगी हमको पकड़ ले❗️
खुल कर जियो दोस्तों, मौत तो अटल सत्य है, उस को तो आना ही है ।
शरीर की सभी बीमारियों को जड़ से खत्म कर देगी यह आयुर्वेदिक औषधि और शरीर में भर देगी नया जोश और स्फूर्ति जिस औषधि का नाम है गिलोय और तुलसी
ग्वारपाठा एक औषधीय पौधा।
एलोवेरा भले ही एक छोटा-सा पौधा है, लेकिन इसके गुण जगजाहिर हैं। इसके अनगिनत फायदों के कारण ही इसे लगभग हर घर में इस्तेमाल किया जाता है। एलोवेरा के फायदे अनेक हैं, चाहे वो स्वास्थ्य के लिए हों, त्वचा के लिए हों या बालों के लिए। ग्वारपाठा के लाभ की लिस्ट लंबी है। हालांकि, तमाम गुणों के बावजूद एलोवेरा कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं है। इसे सिर्फ घरेलू नुस्खे की तरह ही इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर कोई गंभीर रोग से पीड़ित है, तो उसे डॉक्टर से इलाज जरूर करवाना चाहिए।
20/06/2023
रत्ती
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यह शब्द लगभग हर जगह सुनने को मिलता है। जैसे - 'रत्ती भर भी परवाह नहीं, रत्ती भर भी शर्म नहीं', रत्ती भर भी अक्ल नहीं... आपने भी इस शब्द को बोला होगा, बहुत लोगों से सुना भी होगा। आज जानते हैं 'रत्ती' की वास्तविकता, यह आम बोलचाल में आया कैसे.
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रत्ती एक प्रकार का पौधा होता है, जो प्रायः पहाड़ों पर पाया जाता है। इसके मटर जैसी फली में लाल-काले रंग के दाने (बीज) होते हैं, जिन्हें रत्ती कहा जाता है।
प्राचीन काल में जब मापने का कोई सही पैमाना नहीं था तब सोना, जेवरात का वजन मापने के लिए इसी रत्ती के दाने का इस्तेमाल किया जाता था.
सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस फली की आयु कितनी भी क्यों न हो, लेकिन इसके अंदर स्थापित बीजों का वजन एक समान ही 121.5 मिलीग्राम (एक ग्राम का लगभग 8वां भाग) होता है।
तात्पर्य यह कि वजन में जरा सा एवं एक समान होने के विशिष्ट गुण की वजह से... कुछ मापने के लिए जैसे रत्ती प्रयोग में लाते हैं। उसी तरह किसी के जरा सा गुण, स्वभाव, कर्म मापने का एक स्थापित पैमाना बन गया यह "रत्ती" शब्द।
साभार
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