Rashmi Health& Beauty Coach

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11/08/2025

मे Rashmi Gupta I'mयह स्पष्ट करता हूँ कि मैं अपनी निजी जानकारी और तस्वीरों के उपयोग के लिए फेसबुक या मेटा को कोई अनुमति नहीं देता हूँ। कल एक महत्वपूर्ण दिन है जिस पर आधिकारिक मुहर रात 9:20 बजे लगाई गई है और यह समाचार टीवी पर प्रसारित किया गया है। फेसबुक के नए नियम कल से लागू होंगे जो आपकी तस्वीरों के उपयोग की अनुमति देते हैं। समय सीमा आज समाप्त हो रही है। कृपया इस संदेश को कॉपी करें और अपने प्रोफाइल पर एक नया पोस्ट बनाकर पेस्ट करें। जो लोग ऐसा नहीं करते हैं उन्हें अनुमति देने वाला माना जाएगा। गोपनीयता के उल्लंघन पर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। मैं अपनी निजी जानकारी और तस्वीरों के उपयोग के लिए फेसबुक या मेटा को कोई अनुमति नहीं देता हूँ।🙏🏽

20/05/2024

Mera Vote mera Adhikar.

14/04/2024
25/03/2024

Rashmi

24/03/2024

#इमली तेरी अजब कहानी
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#इमली (अंग्रेजी:Tamarind) पादप कुल फैबेसी का एक वृक्ष है। इसके फल लाल से भूरे रंग के होते हैं, तथा स्वाद में बहुत खट्टे होते हैं।

#इमली का नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है प्रकृति में बहुत कुछ अद्भुत एवं अकल्पनीय है । कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, पोटैशियम, फाइबर और मैंगनीज जैसे तत्वों से भरपूर इमली का खट्टा-मीठा स्वाद कई बार मूड को भी ठीक कर देता है।

#पानीपूरी
इसका सबसे अधिक इस्तेमाल पानीपूरी के पानी और चटनी बनाने में किया जाता है। यह खाने में स्वाद तो बढ़ाती है साथ ही सेहत के लिए गुणकारी भी है।

दक्षिण भारत में दालों में रोजाना कुछ खट्टा डाला जाता है, ताकि वह सुपाच्य हो जाए। विशेषकर आंध्र प्रदेश वासी इमली का भोजन में बेइंतहा इस्तेमाल करते थे, पर 400 वर्ष पूर्व जब #पुर्तग़ालियों ने भारत में प्रवेश किया तब वे अपने साथ टमाटर भी लाए, अतः धीरे-धीरे इमली की जगह #टमाटर का इस्तेमाल होने लगा। तब से टमाटर का इस्तेमाल चल ही रहा है, लेकिन कुछ समय से इस संबंध में नई व चौंकाने वाली जानकारियाँ मिल रही हैं।

#इमली_तेरी_अजब_गजब_कहानी
एक बार आंध्रप्रदेश का एक पूरा गाँव #फ्लोरोसिस की चपेट में आ गया। इस रोग में फ्लोराइड की अधिक मात्रा हड्डियों में प्रवेश कर जाती है, जिससे हड्डियाँ टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि वहाँ पीने के पानी में फ्लोराइड अधिक मात्रा में मौजूद है, अतः यह रोग फैला। पहले इमली इस #फ्लोराइड से क्रिया कर शरीर में इसका अवशोषण रोक देती थी, लेकिन टमाटर में यह गुण नहीं था, अतः यह रोग उभरकर आया। तब पता चला कि इमली के क्या फायदे हैं।

सेहत के लिए गुणकारी
#गर्मियों में ताजगी दायक पेय
इमली को पानी में कुछ देर के लिए भिगोएँ व मसलकर इसका पानी छान लें। अब उसमें स्वादानुसार गुड़ या शकर, नमक व भुना जीरा डाल लें। इसमें डले ताजे पुदीने की पत्तियाँ स्फूर्ति की अनुभूति बढ़ाती हैं।

#पित्त समस्याओं के लिए
रोजाना रात को एक बेर के बराबर मात्रा इमली कुल्हड़ में भिगो दें। सुबह मसलकर छान लें। थोड़ा मीठा डालकर ख़ाली पेट पी जाएँ। छह-सात दिन में लाभ नजर आने लगेगा।

इसकी पत्तियां पेट के कीड़ों का नाश करती हैं। पीलिया में भी यह लाभकारी है। इसका उपयोग अल्सर की चिकित्सा के लिए भी किया जाता है।

#सामान्य सर्दी
दक्षिण भारत में सर्दी के इलाज के लिये इमली को प्रभावकारी माना जाता है। पिसी हुई इमली के साथ 1 चम्मच काली मिर्च को पानी में कुछ समय उबालने के बाद इसका सेवन किया जाता है।

#केंसर
यह एंटीआक्सीडेंट का अच्छा स्रोत होने के क

24/03/2024

Happy Choti Holi🙏

19/03/2024

अतं तक जरूर पढे
एक बहुत छोटी सी बात है पर हमने उसे विस्मृत कर दिया हमारी भोजन संस्कृति, इस भोजन संस्कृति में बैठकर खाना और उस भोजन को "दोने पत्तल" पर परोसने का बड़ा महत्व था कोई भी मांगलिक कार्य हो उस समय भोजन एक पंक्ति में बैठकर खाया जाता था और वो भोजन पत्तल पर परोसा जाता था जो विभिन्न प्रकार की वनस्पति के पत्तो से निर्मित होती थी.

क्या हमने कभी जानने की कोशिश की कि ये #भोजन पत्तल पर परोसकर ही क्यो खाया जाता था?नही क्योकि हम उस महत्व को जानते तो देश मे कभी ये "बुफे"जैसी खड़े रहकर भोजन करने की संस्कृति आ ही नही पाती.
जैसा कि हम जानते है पत्तले अनेक प्रकार के पेड़ो के पत्तों से बनाई जा सकती है इसलिए अलग-अलग पत्तों से बनी पत्तलों में गुण भी अलग-अलग होते है| तो आइए जानते है कि कौन से पत्तों से बनी पत्तल में भोजन करने से क्या फायदा होता है?

लकवा से पीड़ित #व्यक्ति को अमलतास के पत्तों से बनी पत्तल पर भोजन करना फायदेमंद होता है|
जिन लोगों को जोड़ो के #दर्द की समस्या है ,उन्हें करंज के पत्तों से बनी पत्तल पर भोजन करना चाहिए|
जिनकी मानसिक स्थिति सही नहीं होती है ,उन्हें पीपल के पत्तों से बनी पत्तल पर भोजन करना चाहिए|
पलाश के पत्तों से बनी #पत्तल में भोजन करने से खून साफ होता है और बवासीर के रोग में भी फायदा मिलता है|
केले के पत्ते पर भोजन करना तो सबसे शुभ माना जाता है ,इसमें बहुत से ऐसे तत्व होते है जो हमें अनेक बीमारियों से भी सुरक्षित रखते है|
पत्तल में भोजन करने से पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता है क्योंकि पत्तले आसानी से नष्ट हो जाती है|
पत्तलों के नष्ट होने के बाद जो खाद बनती है वो खेती के लिए बहुत लाभदायक होती है|
पत्तले #प्राकतिक रूप से स्वच्छ होती है इसलिए इस पर भोजन करने से हमारे शरीर को किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती है|
अगर हम पत्तलों का अधिक से अधिक उपयोग करेंगे तो गांव के लोगों को #रोजगार भी अधिक मिलेगा क्योंकि पेड़ सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रो में ही पाये जाते है|

अगर पत्तलों की मांग बढ़ेगी तो लोग पेड़ भी ज्यादा लगायेंगे जिससे #प्रदूषण कम होगा|
डिस्पोजल के कारण जो हमारी #मिट्टी, नदियों ,तालाबों में प्रदूषण फैल रहा है ,पत्तल के अधिक उपयोग से वह कम हो जायेगा|

जो मासूम #जानवर इन #प्लास्टिक को खाने से बीमार हो जाते है या फिर मर जाते है वे भी सुरक्षित हो जायेंगे ,क्योंकि अगर कोई जानवर पत्तलों को खा भी लेता है तो इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा|

सबसे बड़ी बात पत्तले, डिस्पोजल से बहुत सस्ती भी होती है|

ये बदलाव आप और हम ही ला सकते है अपनी #संस्कृति क

19/03/2024

Have a nice day😃

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