jyotish tantra Sadhna

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jyotish anushthan ta**ra Sadhna

28/11/2023

वास्तु

मेरे मित्र घर का वास्तु पुरा उल्टा है जिसको सही करवाने के लिए घर का कोई भी सदस्य तैयार नहीं है … मेरे पास कोई भी इनकम सोर्स नहीं है जिससे किराये का भी मकान लिया जा सकें … पिछले कुछ सालों से सरकारी नौकरी की प्रीपेशन कर रहा हूँ पर आज तक सफलता नही मिली बहुत ज़्यादा परेशानी व डिप्रेशन में हूँ मित्र को उचित मार्गदर्शन किया।🙏😭

भाई… आप सुबह …दोपहर …व शाम दिन में तीन टाइम पूर्व दिशा में फेस करके क़रीब 15 -15 मिनट तक रोज़ सूर्य मुद्रा करें।
इससे ना सिर्फ़ आपका डिप्रेशन तुरन्त दूर होगा बल्कि उत्तम स्वास्थ्य के साथ आत्मविश्वास बढ़ेगा व एक नयी ऊर्जा का संचार होगा जिसमें रूके हुए काम तुरन्त होगें प्रतिष्ठा बढ़ेगी राजकृपा प्राप्त होगी व सरकारी नौकरी भी तुरन्त लग जायेगी।

नोट - अनामिका अंगुली को हथेली की ओर मोड़कर उसे अगुठे से दबाएं, बाकी बची तीनों ऊंगलियों को सीधा रखें। इसे सूर्य मुद्रा कहते हैं।
🙏😊🙏

28/11/2023

*उल्टा स्वस्तिक*
देव स्थान पर स्वस्तिक बनाकर उसके ऊपर पंच धान्य या दीपक जलाकर रखने से कुछ ही समय में इच्छीत कार्य पूर्ण होता है। इसके अलावा मनोकामना सिद्धी हेतु मंदिर में गोबर या कंकू से उलटा स्वस्तिक बनाया जाता है। फिर जब मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वहीं जाकर सीधा स्वस्तिक बनाया जाता है।

बहुत से लोग किसी देव स्थान, तीर्थ या अन्य किसी जागृत जगह पर जाते हैं तो मनोकामना मांगते वक्त वहां पर उल्टा स्वस्तिक बना देते हैं और जब उनकी उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो पुन: उक्त स्थान पर आकर सीधा स्वस्तिक मनाकर धन्यवाद देते हुए प्रार्थना करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। ध्यान रखें कभी भी मंदिर के अलावा कहीं और उल्टा स्वस्तिक नहीं बनाना चाहिए।

28/11/2023

राहु की दशा

गेंहू के रोटी खाना न के बराबर कर दीजिए
ज्वार की रोटी खाये
सूर्यास्त से पूर्व भोजन करे
सारदा माँ की भक्ति कीजिये राहु की महादशा फर्स से अर्स का रास्ता बन जाएगा
युक्ति होगी 6 साल पूर्व संघर्ष अधिक होगा
अकेला हुवा लास्ट के 6 वर्ष अत्यधिक संघर्ष

28/11/2023

पूर्व दिशा-
पूर्व दिशा में सूर्य ग्रह है। इस दिशा में घर का द्वार या खिड़की होना चाहिए या इसे खाली रखें। इस दिशा के दूषित होने से पिता से झगड़ा, सरकार या सरकारी नौकरी से परेशानी, मस्तिष्क दुर्बलता, ज्वर, सिरदर्द, पीलिया, नेत्र, हृदय, चर्म, क्षय एवं अस्थिरोग आदि होने की संभावना रहती है।
आग्नेय कोण-
आग्नेय दिशा में शुक्र ग्रह है। इस दिशा में गैस, बॉयलर, ट्रांसफॉर्मर, रसोईघर आदि होना चाहिए। इस दिशा के दूषित होने से स्त्री सुख में बाधा, वाहन से कष्ट, श्रृंगार के प्रति अरुचि, नपुंसकता, हार्निया, मधुमेह, धातु एवं मूत्र संबंधी रोग, गर्भाशय संबधी रोग आदि हो सकते हैं।
दक्षिण दिशा-
दक्षिण दिशा में मंगल ग्रह है। इस दिशा में घर का भारी सामान रखें। यह दिशा यदि दूषित है तो गृहस्वामी को कष्ट, भाइयों से कटुता, क्रोध की अधिकता और दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। रक्तचाप, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, फोड़े-फुंसी, बवासीर, चेचक, प्लेग आदि रोग होने की आशंका रहती है।
नैऋत्य कोण-
इस दिशा में राहु और केतु ग्रह हैं। घर के मुखिया का कमरा, कैश काउंटर, मशीनें आदि इस दिशा में रख सकते हैं। इस दिशा के दूषित होने से परिवार में असमय मौत, दादा या नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू-टोने का भय, त्वचा, कुष्ठ, मस्तिष्क, छूत, रक्त विकार, दर्द, चेचक, हैजे, चर्म आदि रोग होने आशंका रहती है।
पश्चिम दिशा-
पश्चिम दिशा में शनि ग्रह है। इस दिशा में रसोईघर या टॉयलेट होना चाहिए। पश्चिम दिशा में दोष है तो नौकरी में परेशानी, वायु विकार, लकवा, रीढ़ की हड्डी में तकलीफ, भूत-प्रेत का भय, चेचक, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, नपुंसकता, पैरों में तकलीफ आदि होने की आशंका रहती है।

वायव्य कोण-
इस दिशा में चन्द्र ग्रह है। इस दिशा में आपका बेडरूम, गैरेज, गौशाला आदि होना चाहिए। इस दिशा के दूषित होने पर माता से संबंध में कटुता, मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, श्वास रोग, कफ, सर्दी-जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म संबंधी रोग, पित्ताशय की पथरी, निमोनिया आदि होने की आशंका बनती है।
उत्तर दिशा-
उत्तर दिशा में बुध ग्रह है। इस दिशा में खिड़की, दरवाजे, घर की बालकनी होना या मुख्य द्वार होना चाहिए। इस दिशा में दोष होने से विद्या-बुद्धि में कमी, वाणी दोष, स्मृति लोप, मिर्गी, मस्तिष्क, गले या नाक के रोग, उन्माद, मतिभ्रम, व्यवसाय में हानि, शंकालुता, मामा से संबंध में कटुता आदि की आशंका रहती है।
ईशान कोण-
इस दिशा में बृहस्पति ग्रह है। इस दिशा में बोरिंग, पंडेरी, स्वीमिंग पूल, पूजास्थल या घर का मुख्य द्वार होना चाहिए। यह दिशा दूषित है तो पूजा-पाठ, देवता और गुरुओं पर आस्था में कमी, आय में कमी, संचित धन में कमी, विवाह में देरी, संतानोत्पत्ति में देरी, मूर्च्छा, उदर विकार, कान का रोग, गठिया, कब्ज, अनिद्रा आदि कष्ट होने की आशंका रहती है

28/11/2023

हकलाने तुतलाना का इलाज की दवा और उपाय

आंवला – अगर रोगी नियमित रूप से 2 ताज़ा हरे आंवला रोजाना चबाकर खाये तो कुछ ही दिनों में उसके तोतलापन की शिकायत पूरी तरह से गायब हो जाती है, इसका प्रयोग महीनो तक करते रहना चाहिए जिससे यह रोग जड़ से समाप्त हो जाता है. इससे आवाज़ साफ़ हो जाती है. (हकलाने और तुतलाना के लिए इस प्रयोग 2-3 महीने तक रोजाना करे)

बादाम की गिरी और 7 कालीमिर्च दोनों को मिलाकर जरा सा पानी डालकर अच्छे से घिस लें व चटनी जैसा बना लें. अब इसमें पीसी बारीक़ मिश्री मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट रहने पर चाटें, कुछ ही दिनों के प्रयोग से तोतलापन हकलाने का इलाज हो जायेगा.

अगर कोई ठीक से साफ़ साफ़ नहीं बोल पता हो तो उसे यह उपाय भी करना चाहिए. इसके सिर्फ 2 कालीमिर्च मुंह में रख कर चूसते रहे, ऐसा आपको दिन में 2-3 बार रोजाना करना चाहिए इस प्रयोग को लम्बे समय तक करे, यह एक बेहतरीन आवाज़ साफ़ करने का उपाय है।

28/11/2023

महा सत्रु नासक मंत्र
महामंत्र ॐ नमो भगवते भुतादिपते विरूपाक्षाय घोर दंष्टिने विकरालिने ग्रह यक्ष भूतेनान् शंकर अमुकं हन हन दह दह पच पच ग्रहण हूं फट् ठः ठः

21/11/2023

ग्रह बाधा शांति के लिए

जिस घर में भूत प्रेत बाधा हो अथवा उसके निवासी बीमार रहते हों , लड़ाई झगड़ा क्लेश रहता हो , धन , सन्तान , पशु की वृद्धि न होती हो , आमदनी में बरकत न हो , किसी ने टोना टोटका करके वृद्धि रोक दी हो तो इन सब आधि व्याधियों को दूर करने के लिए निम्न शावर मंत्र अद्वितीय है । इसको किसी मन्दिर या निर्जन स्थान में सिद्ध किया जा सकता है । निर्जन स्थान इसलिए उपयुक्त समझा जाता है कि साधना काल में विघ्न उपस्थित न हो । बस्ती में पूजा स्थान होने से आसपास के लोग कौतुहलवश विघ्न पैदा कर सकते हैं।

घर में जितने द्वार हों उतनी लोहे की कीलें ले लो । जितने कमरे हों प्रति कमरा दस ग्राम के हिसाब से साबत काले उड़द ले लो । थोड़ा सिंदूर तेल या घी में मिलाकर कीलों पर लगा लो । कमरे की चौखट लकड़ी की है या ईट चूने की है तो उसमें ठोंकने के लिए दो इंच की कील काफी होगी । परन्तु यदि फर्श सीमेन्ट या चिप्स का है तो दरवाजे में ठोकने के लिए आधा इंच की कील पर्याप्त होगी । निम्न मन्त्र को सिद्ध करने के बाद व्याधिग्रस्त घर के प्रत्येक कमरे में जाकर मन्त्र पढ़कर उड़द के दाने सब कमरों में चारों कोनों में आंगन बरामदे में बिखेर दो और द्वार पर कील ठोंक दो । इसी प्रकार मुख्य द्वार की चौखट पर भी अभिमन्त्रित कील मंत्र पढ़कर ठोक दो ।
मन्त्र
ॐ नमो आदेश गुरन को , ईश्यर वाचा अजरी बजरी बाड़ा , बज्जरी में बज्जरी , बांधा दसौं दुआर , छवा और के घालौं , तो पलट हनुमन्त वीर उसी को मारे । पहली चौकी गनपती , दूजी चौकी हनुमन्त , तीजी चौकी में भरौं , चौथी चौकी देत रक्षा करन को आवै सिरी नरसिंहदेव जी । शब्द साँचा पिण्ड कांचा फुरै मंत्र ईश्वरी वाचा ।

21/11/2023

इंसान के अंदर भी छिपा दिब्य शक्ति

जैसे दूध में घृत होता है वैसे सृष्टि में स्रष्टा विद्यमान है , जैसे दूध को जमाने पर वह स्थिर हो कर शांति होजाता है , ठीक ऐसे ही जीव अभ्यास द्वारा आत्मा को परमात्मा में स्थिर करे । फिर जैसे दही को मथकर मक्खन प्राप्त किया जाता है , ठीक ऐसे ही जीव स्वयं को मथकर आत्मज्ञान प्राप्त करे । जैसे मक्खन को तपाकर उससे अंत मे घृत प्राप्त किया जाता है , जीव को चाहिए कि वह ठीक ऐसे ही आत्मज्ञान ( मक्खन ) में को तपाकर ब्रह्मज्ञान प्राप्त करे , ओर ब्रह्म ही हो जाये । जैसे अंत मे दूध मक्खन ही हो जाता है , वैसे ही जीव ब्रह्म ही हो जाता है ।

21/11/2023

क्यो छत पर न डाले कबूतरों को दाना ?
अगर आप घर की छत पर कबूतरों के लिए दानां बिखेरते हैं , या कबूतरों के आपके घर में घोंसला बना रखा हैं या आपने जंगली कबूतर पाले हुए हैं , तो सावधान हो जाये । क्योंकि इनसे आप पर संकट आ सकता हैं । कबूतरों को दाना डालना पुण्य का काम हैं , लेकिन इससे आपको लाभ की बजाये हानि भी हो सकती हैं । अगर आप अपने घर की छत पर कबूतरों को दाना खिलाते हैं , तो यह आपकी भाग्य को नुकसान पहचा सकता हैं । छत राह का प्रतीक हैं । छत जब गंदा होता हैं तो राहू अशुभ फल देता हैं । ऐसे में जब आपको छते पर ही कबूतरों को दाना खिलाना हैं तो कबूतरों के दाना खाने के बाद छत को पानी से पूरी तरह धो कर साफ़ कर दे । अगर आप ऐसा नहीं कर सकते हैं तो भूल कर भी कबूतरों को घर की छत पर दाना न डाले । क्योंकि कबूतर दाना खा कर छत पर गंदगी फैला देते हैं , जिससे राहू अशुभ परिणाम देने लगता हैं और आपके घर में दरिद्रता का वास होता हैं अथवा घर में क्लेश की संभावना बनती है । आप कबूतरों की सेवा जरूर करे , लेकिन अपने घर की छत पर . जन्म तारीख के अनुसार जानते हैं कबूतर को क्या खिलाना चाहिए -

मूलांक 1 वाले जातक मूलांक 1 का मतलब यह हैं अगर आपका जन्म 1 तारीख , 10 तारीख , 19 तारीख या 28 तारीख को हुआ हैं तो आपका मूलांक 1 हैं । ऐसे लोगो को कबूतर को गेंहू और भुट्टा मिलाकर 3 महीने तक कबूतरों को खिलाना चाहिए ।

मूलांक 2 वाले जातक जिन लोगो का जन्मदिन 2,11 , 20 या 29 तारीख को आता हैं तो ऐसे लोगो का मूलांक अंक 2 होता हैं । मूलांक 2 वाले जातक कबूतर को साबुत चावल और बाजरा मिला कर रोजाना खिलाये ।

मूलांक 3 के जातक अगर आपका जन्मदिन किसी भी महीने की 3 तारीख , 12 तारीख या 21 तारीख और 30 तारीख को आता हैं तो आपका मूलांक 3 हैं । तो आपको चने की दाल और बाजरा मिला के 7 मुट्ठी कबूतरों को डालना चाहिए ।

मूलांक 4 के जातक अगर आपका जन्मतिथि महीने की 4,13 , 22 , 31 तारीख को पड़ती हैं तो आपका मूलांक 4 हैं । मूलांक 4 वाले जातकों को एक किलो बाजरा कबूतरों को डालना चाहिए ।

मूलांक 5 वालों जातक कबू Lodogan अगर आप किसी भी महीने की 5 तारीख , 14 तारीख या 23 तारीख को पैदा हुए है तो आप कबूतरों को बाजरा जरूर खिलाये ।

मूलांक 6 वाले जातक खेलाये । ऐसे लोग जिनका जन्म महीने की 6 , 15 , 24 तारीख को हुआ हैं , उन लोगो को कबूतरों को ज्वार - बाजरा खिलाना चाहिए । मूलांक 6 के जातक कबूतरों को सफ़ेद तिल भी डाल सकते हैं , इससे उनका भाग्योदय होने लगता हैं ।

मूलांक 7 वाले जातक अगर आपका मूलांक 7 हैं यानी की आपका जन्म किसी भी महीने की 7 , 16 , 25 तारीख को हुआ हैं तो आपको 7 मुट्ठी मोठ की दाल कबूतरों को खिलाना चाहिए ।

मूलांक 8 वाले जातकों किसी भी महीने की 8 , 17 , 26 तारीख को पैदा होने वाले लोगो का मूलांक अंक 8 होता हैं । मूलांक 8 वाले जातक ज्वार और बाजरा को मिक्स करके कबूतरों को खिलाये ।

मूलांक 9 वाले जातक मूलांक 9 यानी की महीने की 9 , 18 , 27 तारीख को पैदा होने वाले जातक कबूतर को गैहू खिलाये । अगर आप गेंहू को भिगो कर उसके बाद कबूतरों को डालेंगे तो यह , आपके लिए कल्याणकारी होगा ।

21/11/2023

जिस जातक का पिता से न बनती हो भोजन में ऊपर से नमक न ले जैसे सलाद व भोजन में नमक कम होने पे
फिर चमत्कार देखे

21/11/2023

जिस जातक को राहु से पीड़ित है भोजन सूर्यास्त से पहले भोजन करे अनुभव महसूस करे

21/11/2023

सूर्य कमजोर हो तो उगते हुवे सूर्य की स्वयम की सेल्फी ले

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